"फिर से-लंबी रातें उसकी यादें"
कृति- मोहित पाण्डेय"ओम"
फिर से आज एकाकीपन है,
फिर से रोया ये तन मन है|
फिर से रात नहीं गुजरी,
यादो से आंखे फिर नम है||
फिर से मैं खुद को भूल गया,
उन लम्हों में फिर डूब गया|
फिर से मैं इतना टूट गया,
वो शक्स हमें फिर लूट गया||
फिर से ये रात सुहानी है,
फिर से पूनम की चांदनी है,
वो रातें कितनी छोटी थी,
इतनी लंबी रातें हमने अब जानी है||
फिर से मेरा मन पागल है,
उस छवि को फिर से ढूढ रहा|
कैसे समझाऊ मैं खुद को,
जो मेरा था अब वो न रहा||
वो मुझको अपना कहता थी,
हर पल संग में रहती थी|
गर चोट हमें लग जाती थी,
तो दर्द के आँसू वो रोती थी||
फिर क्यों आज हमें वो छोड़ गयी,
क्यों हर नाते हमसे तोड़ गयी|
ये दिल भी तो तुम्हारा था,
क्यों फिर इसको तनहा छोड़ गयी||
ये रातें कितनी लंबी है, क्यों हमको अकेला छोड़ गयी||
हिंदी और हिंदी साहित्य को आसमां तक पहुचाने का प्रयास एक नए दृष्टिकोण के साथ ..
Thursday, 31 May 2012
Friday, 4 May 2012
दिल की हसरत
दिल की हसरत
दिल की हसरत है कि बस तेरा दीदार करूं|
सिर्फ दो पल के लिए ही सही, जी भर के तुम्हे प्यार करूं|
चाँद तो सिर्फ रातों में निखरता है,
हर एक पल निखरे हुए चाँद से इजहार करूँ|
इतनी प्यारी मुस्कराहट है तेरी,
उस पे सौ बार जिंदगियाँ कुर्बान करूं|
दिल की हसरत है कि बस तेरा दीदार करूं|
सिर्फ दो पल के लिए, तुम्हे जी भर के प्यार करूं|
तेरे दांतों से चाँद को जो चांदनी मिलती, उससे अपने दिल का श्रृंगार करूँ|
सिर्फ दो पल के लिए ही सही, जी भर के तुम्हे प्यार करूं|
Wednesday, 25 April 2012
"अपना बना लीजिए"
कृति-- मोहित पाण्डेय "ओम"
अपनी नजरों में हमको बसा लीजिए,
हमको इतनी बड़ी अब सजा दीजिए |
सब दीवाने तुम्हारे है तो क्या हुआ,
अब तो हमको भी अपना बना लीजिए||
अपने चेहरे से घूँघट हटा दीजिए,
इन काली घटाओं में खुद को समां लीजिए|
इश्क में हम बेहोश तो क्या हुआ.
अपने होंठों से मदिरा पिला दीजिए ||
इन तीखी निगाहों से न क़त्ल कीजिये,
हमसे करके मुहब्बत अपना बना लीजिए|
तेरे इश्क में बदनाम हुए तो क्या हुआ,
अपनी नजरों में हमको बसा लीजिए|
अपने चेहरे से घूँघट हटा दीजिए ||
अपनी नजरों में हमको बसा लीजिए,
हमको इतनी बड़ी अब सजा दीजिए |
सब दीवाने तुम्हारे है तो क्या हुआ,
अब तो हमको भी अपना बना लीजिए||
अपने चेहरे से घूँघट हटा दीजिए,
इन काली घटाओं में खुद को समां लीजिए|
इश्क में हम बेहोश तो क्या हुआ.
अपने होंठों से मदिरा पिला दीजिए ||
इन तीखी निगाहों से न क़त्ल कीजिये,
हमसे करके मुहब्बत अपना बना लीजिए|
तेरे इश्क में बदनाम हुए तो क्या हुआ,
अपनी नजरों में हमको बसा लीजिए|
अपने चेहरे से घूँघट हटा दीजिए ||
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