Saturday, 4 August 2012

हाइकु, लिखने की एक कोशिश

कृति- मोहित पाण्डेय"ओम"

१. शीशा तोड़ दे ...
ये उनकी अदा है...
जख्म देने की ....


२. तेज धूप है...
सूरज जवान है....
फिर बारिश ....

३. रो रहा होगा..
दिल टूटने पर ...
ये आसमान ....


४. दंगा फसाद...
इंसानियत मरी
नेता का काम .....

५. तू डर गया?
बाजू में दम नहीं ?
है शिकश्त दे....

Thursday, 2 August 2012

"हँसने की कोशिश करते है"

कृति -- मोहित पाण्डेय"ओम"


गम के सागर में डूबे रहते है,
फिर भी हँसने की कोशिश करते है|
ये जमाना अगर हमसे रूठे भी तो,
हम तो अपने ही जलवे में रहते है ||

उनको नफरत है हमसे तो हम क्या करे,
हम तो अब भी मोहब्बत करते है |
कोई पागल कहे, आवारा कहे,
उनकी गलियों में जाया करते है||

तुम दीवानों की बातें मत करना,
वो तो मर के भी जिन्दा रहते है|
कभी उसने हमें अपना माना था,
हम तो अपनों को दिल में रखते है||

है वो पागल जो गैरो पे मरते है,
हम तो अपनों कि खातिर जीते है|
मेरी आँखों में आँसू रहते है,
फिर भी हँसने की कोशिश करते है||
गम के सागर में डूबे रहते है ...........

Wednesday, 25 July 2012

भूले-बिसरे

मोहित पाण्डेय "ओम"

१.    जिंदगी को जिस तरह हमने जिया, 
       शायद ही कोई शक्सियत जी पायेगी |
       उनके होंठों से जाम हमने पिया ,
       हमें न अब कोई दूजी जाम भाएगी ||

       वो तो चले गए हमें मदहोश करके,
       मगर उनसे जुदाई और गम-ए-उल्फत में ये जान चली जायेगी|
       मगर अफ़सोस, तब ये मदहोशी हमेशा की हो जायेगी |
       गर फक्र है, कभी हमारी भी इश्क-ए-दास्ताँ इबारत पढ़ी जायेगी ||

२.    इतना मत सताओ हमें, हम तेरा शहर छोड़ जायेंगे |
       जान मांग कर के तो देख, तेरी ही चौखट पे दम तोड़ जायेंगे|
       दीवाने तो मरते ही है यहाँ, पर हम अपनी आशिकी की एक मिशाल छोड़ जायेंगे |
       फिर अपनी मोहब्बत का इजहार मत करना, क्यों कि कब्र में दफ़न हम दिल्लगी कर न पाएंगे 

३.    सोचा था मुहब्बत न करेंगे, क्यों कि इसमें दर्द-ए-सुरूर होता है|
       फिर दिल ने आवाज दी लगा ले दिल, बिना दिल्लगी के कौन यहाँ मशहूर होता है||